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Joe Root's UNBEATEN 99 Breaks Indian Hearts — England Level the Series!
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इंग्लैंड को जीत के लिए 11 रन चाहिए थे।
जो रूट को अपनी सेंचुरी पूरी करने के लिए सिर्फ़ एक रन।
लेकिन सबसे दिलचस्प बात यह थी कि न जो रूट को अपनी सेंचुरी की जल्दी थी और न ही गस एटकिंसन को उन्हें स्ट्राइक वापस देने की।
इंग्लैंड के ड्रेसिंग रूम में शायद एक ही चीज़ सिखाई जाती है—टीम पहले, व्यक्तिगत रिकॉर्ड बाद में।
इसी सोच का नतीजा था कि मैच खत्म हुआ, इंग्लैंड जीत गया और जो रूट 99 रन* पर नाबाद रह गए।
और यह भी नहीं भूलना चाहिए कि यही इंग्लिश क्रिकेट है, जहाँ कुछ साल पहले व्यक्तिगत उपलब्धियों की सबसे ज़्यादा चर्चा होती थी और उन्हें सबसे ज़्यादा महत्व दिया जाता था।
शायद ब्रेंडन मैकुलम के आने के बाद एक चीज़ ज़रूर बदली है। यह इंग्लैंड की टीम न टेस्ट क्रिकेट में और न ही व्हाइट-बॉल क्रिकेट में व्यक्तिगत रिकॉर्ड्स पर ज़्यादा ध्यान देती है।
अब बात भारत की बल्लेबाज़ी की।
रोहित शर्मा एक बार फिर संघर्ष करते हुए दिखाई दिए और जल्दी आउट हो गए। रोहित की बल्लेबाज़ी पर हम अलग से बात करेंगे।
शुभमन गिल को अच्छी शुरुआत मिली, लेकिन वह उसे बड़ी पारी में नहीं बदल पाए।
इसके बाद विराट कोहली और श्रेयस अय्यर पूरी तरह नियंत्रण में दिखाई दे रहे थे। एक समय ऐसा लग रहा था कि भारत कम से कम 320 रन तक पहुँच जाएगा।
लेकिन फिर आया हैरी ब्रूक की कप्तानी का मास्टरस्ट्रोक।
उन्होंने जोफ्रा आर्चर को दोबारा आक्रमण पर लगाया और अपने नए स्पेल की तीसरी ही गेंद पर विराट कोहली को पवेलियन भेज दिया।
यहीं से पूरे मैच का मोमेंटम बदल गया।
भारत ने अपने आख़िरी सात विकेट सिर्फ़ 55 रन के भीतर गंवा दिए।
इस पतन की शुरुआत आर्चर ने की। उन्होंने तीन विकेट लिए, जबकि गस एटकिंसन ने दो और विकेट लेकर दबाव को और बढ़ा दिया। साक़िब महमूद ने भी अपना रोल बेहतरीन तरीके से निभाया।
लेकिन इस बल्लेबाज़ी पतन की नींव सैम करन और विल जैक्स ने रखी थी।
दोनों ने अपनी अनुशासित गेंदबाज़ी से भारत के रन बनाने की रफ़्तार लगभग रोक दी। भारत बाउंड्री तलाश रहा था और इंग्लैंड लगातार दबाव बना रहा था।
जैसे ही दबाव बढ़ा, इंग्लैंड का शॉर्ट-बॉल प्लान पूरी तरह सफल हो गया।
वॉशिंगटन सुंदर, अक्षर पटेल और शिवम दुबे जिस तरह आउट हुए, वह किसी स्थापित बल्लेबाज़ की नहीं, बल्कि निचले क्रम के बल्लेबाज़ों की बल्लेबाज़ी जैसी लग रही थी।
यही बल्लेबाज़ी पतन भारत को 233 रन पर समेट गया, वह भी सिर्फ़ 44 ओवरों में। पूरे 6 ओवर अभी बाकी थे।
और सबसे बड़ी बात...
इस हार का ज़िम्मेदार भारत का गेंदबाज़ी आक्रमण नहीं था।
जसप्रीत बुमराह ने अपना काम बख़ूबी किया। प्रसिद्ध कृष्णा भी ठीक-ठाक रहे। गुरनूर बराड़ थोड़े महंगे ज़रूर साबित हुए, लेकिन उन्होंने पूरा प्रयास किया और दो विकेट भी लिए।
कुलदीप यादव की कमी ज़रूर महसूस हुई।
लेकिन सवाल यह भी है कि अगर कुलदीप यादव खेलते, तो किसकी जगह खेलते?
इस हार का सबसे बड़ा गुनहगार सिर्फ़ भारत की बल्लेबाज़ी रही।
अब सीरीज़ 1-1 की बराबरी पर है।
और अब फ़ैसला होगा लॉर्ड्स में—द होम ऑफ क्रिकेट।
