
धर्म
छेरा पहँरा: जब राजा सोने की झाड़ू लगाता है!
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ओडिशा की जगन्नाथ रथ यात्रा का सबसे अनोखा दृश्य वह होता है, जब पुरी के गजपति महाराजा सोने के हत्थे वाली झाड़ू लेकर भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के रथों को साफ़ करते हैं। इस अनुष्ठान को छेरा पहँरा कहा जाता है। राजा पहले चाँदी की पालकी में रथों तक पहुँचते हैं। फिर वे रथ पर चढ़कर भगवान की पूजा करते हैं। इसके बाद वे सोने की झाड़ू से रथ के फर्श को प्रतीकात्मक रूप से साफ़ करते हैं और चंदन-मिश्रित सुगंधित जल तथा फूल अर्पित करते हैं।
लेकिन इसका सबसे बड़ा संदेश क्या है?
भगवान जगन्नाथ के सामने कोई राजा नहीं होता, कोई गरीब नहीं होता। गजपति महाराजा स्वयं को भगवान जगन्नाथ का पहला सेवक (Adya Sevak) मानते हैं, शासक नहीं। इसलिए यह परंपरा सदियों से चली आ रही है और यह बताती है कि सत्ता से बड़ा सेवा का भाव है। यही कारण है कि छेरा पहँरा केवल एक रस्म नहीं, बल्कि विनम्रता, समानता और भक्ति का प्रतीक माना जाता है। रथ यात्रा में इसी अनुष्ठान के बाद भक्त रथों को खींचना शुरू करते हैं। JNJIJ
