देश
Meerut की 140 साल पुरानी Library : जहां गांधी-नेहरू आते थे, आज बदहाली की शिकार!
शेयर करें:
मेरठ का ऐतिहासिक घंटाघर शहर की पहचान माना जाता है, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि शहर के हृदय में स्थित तिलक पुस्तकालय उससे भी पुरानी विरासत है। वर्ष 1886 में स्थापित इस पुस्तकालय का मूल नाम "लायल पुस्तकालय" (Lyall Library) था। यह केवल एक पुस्तकालय नहीं, बल्कि मेरठ के बौद्धिक, सामाजिक और राजनीतिक इतिहास का जीवंत साक्षी रहा है।
ब्रिटिश काल में स्थापित लायल पुस्तकालय उस दौर में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रमुख ज्ञान केंद्रों में गिना जाता था। यहां देश-विदेश की दुर्लभ पुस्तकें, समाचार पत्र और शोध सामग्री उपलब्ध रहती थीं। स्वतंत्रता आंदोलन के समय यह स्थान विचारों और बहसों का महत्वपूर्ण केंद्र भी बन गया था।
स्थानीय इतिहासकारों और उपलब्ध ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार, स्वामी विवेकानंद, महात्मा गांधी और पंडित जवाहरलाल नेहरू जैसी महान हस्तियों का भी इस पुस्तकालय से संबंध रहा। कहा जाता है कि मेरठ प्रवास के दौरान उन्होंने यहां आकर अध्ययन किया या पुस्तकालय का उपयोग किया था। चाहे इन घटनाओं के विस्तृत अभिलेख आज सीमित हों, लेकिन यह तथ्य पुस्तकालय की ऐतिहासिक प्रतिष्ठा को दर्शाता है। #TilakLibrarymeerut #LyallLibrarymeerut #Meerut #MeerutHistory #HistoricalLibrary #Heritagemeerut #IndianHistory #SwamiVivekananda #MahatmaGandhi #JawaharlalNehru #Library #HistoryOfMeerut #UttarPradesh #HistoricalPlaces #SaveHeritage #Ektak #meerutghantaghar #MeerutNews #HistoryExplained #IndianHeritage
